क्या गुजरात का उपचुनाव कांग्रेस और भाजपा की है प्रतिष्ठा की लड़ाई
हाल ही में विधानसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन ना होने की वजह से भारतीय जनता पार्टी आने वाले चुनाव को लेकर काफी सतर्क और चुस्त और दुरुस्त हो गई है । इसी महीने में गुजरात के उप चुनाव होने वाले हैं । कहीं न कहीं गुजरात का उपचुनाव कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के प्रतिष्ठा की लड़ाई राजनीति क्षेत्र में हो सकती है ।
गौरतलब है कि आने वाले 20 दिसंबर को गुजरात की जसदड विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं । इस चुनाव के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने अपनी सारी ताकत झोंक दी है । वहीं मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए राजनीतिक नेता किसी भी प्रकार का कोई भी मौका नहीं चूक रहे हैं । वे मतदाताओं के दिल में जगह बनाने के लिए बैलगाड़ी की सवारी से लेकर चाय बनाने और ढोल की थाप पर नाच भी रहे हैं । भारतीय जनता पार्टी के राजनेता और कांग्रेस के राजनेता किसी भी तरीके से इस चुनाव में जीत हासिल करना चाहते हैं ।
क्या गुजरात का उपचुनाव कांग्रेस और भाजपा की है प्रतिष्ठा की लड़ाई
गुजरात का उपचुनाव कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन कर खड़ी हो गई है क्योंकि लोकसभा चुनाव के आने से पहले यह राज्य का अंतिम उपचुनाव है । जहां पर दोनों पार्टियों के लिए यहां प्रतिष्ठा की बात बन चुकी है ।
भारतीय जनता पार्टी की ओर से गुजरात के उपचुनाव के लिए उम्मीदवार भी निश्चित कर दिया गया है । उम्मीदवार कैबिनेट मंत्री कुंवरजी बावलिया हैं । गौरतलब है कि कुंवरजी बावलिया पहले कांग्रेस में शामिल थे लेकिन पार्टी की ओर से नेता विपक्ष बनाए जाने से यह इसी साल जुलाई महीने में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें उसी दिन कैबिनेट मंत्री बना दिया ।
राजनीतिक पंडितों का माना जा रहा है कि गुजरात का उपचुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए उसके बनाई गई रणनीतिओ के परीक्षण है । जिससे कि वह गुजरात के सबसे बड़े समुदाय कोली समुदाय को बावलिया के माध्यम से लुभाने की कोशिश करने में लगी है । वहीं कांग्रेस के लिए यह गुजरात का उपचुनाव प्रतिष्ठा की लड़ाई है ।
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